इशाक मोहम्मद वकील की जुबानी
15 अगस्त सन 1947 कु हुयो मुल्क आज़ाद जाते जाते फ़िरंगी कर गये भारत हे बरबाद मुल्क को हिस्सो काट के बना दियो पाकिस्तान अफरा तफ़री मच गई , कटा हिंदू और मुसलमान अलवर भरतपुर रियासत में फैली यु दंगान की आँच मेवन के गामन में फ़ौज करन लगी नंगों नाच दोनों रियासतन ने जारी करो शाही फ़रमान या तो हिंदू बनो या फिर दबो जाके क़ब्रिस्तान घर ढोर जंगल छोड़ के पड़े मेव अंग्रेज़ी में आर विपदा आयी कोम पे हुई रियासत में लुटमार भुतेरा मेव मुर्तद हो गया लीनी चुटिया राख जुल्म करा हा महाराज ने गाम करा हा ख़ाक जुल्म कोम पे देख के करो सरदारी ने विचार अपनी बात कहन कु पहुँच नेहरू पटेल के द्वार पटेल सुनके बात मेवन की गयो चुप्पी सी मार सहमता मेव आयो जोश में, डुक दियो मेज़ पे मार सुन वज़ीर ए ख़ारजा , हमन ने मत हल्के में टाल हम वही मेव हा जो लाया शिवा जी आगरा सु निकाल हम वा राजा हसन खां मेवाती की हे औलाद जो बाबर सु लड़ो हो राणा सांगा के साथ आज तु भूल गो मेव कोम को बलिदान हल्दी घाटी में भी हज़ारो मेव हुया क़ुर्बान हम वंशज राम कृष्ण का असल छतरी राजपूत आज हमन पे जुल्म ढा रहो मंगल सिंग को कपूत हिमता की खरी बात सू पड़ो पटेल पे बोझ तुरंत पटेल ने भेज दी दोनों रियासतन में फौज़ गांधी जी तक पहोच गई मेवन की सब बात उन्नीस दिसंबर घासेड़ा आ पहुँचो ले रणबीर हे साथ मेवन का हज़ारो क़ाफ़िला पहुँचे घासेड़ा आर गांधी जी ने करी हाथ जोड़ के सब सू एक गुहार मेव रीढ़ की हड्डी या देश की , हा ये देश की जान बराबर को हक़ सबको मिले , मत जावो पाकिस्तान गांधी जी की बात पे वापस लोटा अपने गाम यु उन्नीस दिसंबर कु दियो मेवात दिवस को नाम पिछले कुछ साल सु संघी समझा हमने ग़ैर सांस्कृत रास्टरवाद के नाम पे बढ़ा रहा है बैर


